आत्महत्या ही आखिर क्यों?

Original price was: ₹199.00.Current price is: ₹99.00.

आखिर इंसान जीने की उम्मीद क्यों खोने लगता है?
यह संवेदनशील Hindi eBook आत्महत्या के पीछे के भावनात्मक संकट, warning signs, परिवार व दोस्तों की भूमिका, सही बातचीत और professional help को सरल भाषा में समझाती है—दर्द को समझने से लेकर उम्मीद की ओर लौटने तक।

Guaranteed Safe Checkout

मन के दर्द, चेतावनी संकेत और उम्मीद की ओर लौटने की संवेदनशील समझ

कभी-कभी बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता है, लेकिन इंसान के भीतर एक ऐसी लड़ाई चल रही होती है जिसके बारे में उसके सबसे करीबी लोगों को भी पता नहीं होता।

आखिर कोई इंसान उस स्थिति तक क्यों पहुँचता है जहाँ उसे जीवन से ज्यादा अपना दर्द दिखाई देने लगता है?

यह eBook आत्महत्या को सनसनीखेज बनाने के बजाय उसके पीछे छिपे भावनात्मक दर्द, निराशा, अकेलेपन, रिश्तों के टूटने, आर्थिक दबाव, सामाजिक तुलना और मानसिक संकट को संवेदनशील और सरल भाषा में समझाती है।

इस पुस्तक में आप जानेंगे कि चेतावनी के संकेत कैसे पहचाने जाएँ, संकट में पड़े व्यक्ति से बातचीत कैसे शुरू करें, कौन-सी बातें नहीं कहनी चाहिए, परिवार और दोस्तों की भूमिका क्या हो सकती है, professional help कब जरूरी होती है और कठिन समय के बाद उम्मीद तथा जीवन से जुड़ाव धीरे-धीरे कैसे वापस बनाया जा सकता है।

यह सिर्फ संकट में पड़े व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि माता-पिता, पति-पत्नी, दोस्तों, शिक्षकों और हर उस व्यक्ति के लिए है जो किसी अपने की खामोशी के पीछे छिपे दर्द को समय रहते समझना चाहता है।

BASTIWALA की एक संवेदनशील Hindi eBook — क्योंकि कभी-कभी सही समय पर सुनी गई एक बात और बढ़ाया गया एक हाथ बहुत मायने रखता है।

नोट: यह eBook जागरूकता और सामान्य शिक्षा के लिए है। यह professional mental-health care या emergency medical assistance का विकल्प नहीं है।

Format: Digital PDF eBook
Language: हिंदी
Author: BASTIWALA

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “आत्महत्या ही आखिर क्यों?”

Your email address will not be published. Required fields are marked *